चंद्रबाबू नायडू देश के सबसे अमीर मुख्यमंत्री: एडीआर रिपोर्ट - Current Affairs

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Wednesday, 14 February 2018

चंद्रबाबू नायडू देश के सबसे अमीर मुख्यमंत्री: एडीआर रिपोर्ट

चंद्रबाबू नायडू देश के सबसे अमीर मुख्यमंत्री: एडीआर रिपोर्ट.

एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) द्वारा देश के 29 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों पर हाल ही में एक रिपोर्ट प्रकाशित की गयी. इस रिपोर्ट में देश के सबसे अमीर तथा मुख्यमंत्रियों की सम्पातियो का ब्यौरा दिया गया है.

राजनीतिक दलों पर निगाह रखने वाले संगठन एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) के नेशनल इलेक्शन वाच (न्यू) के साथ मिलकर यह रिपोर्ट तैयार की है. दोनों संगठनों ने देशभर में राज्य और केंद्र शासित प्रदेश की विधानसभा चुनावों के दौरान मौजूदा मुख्यमंत्रियों द्वारा स्वयं जमा किए गए हलफनामों का अध्ययन कर यह निष्कर्ष निकाला है.

एडीआर की रिपोर्ट के मुख्य बिंदु

•    एडीआर की रिपोर्ट के अनुसार 31 मुख्यमंत्रियों में से 11 ने स्वयं के खिलाफ आपराधिक मामले दायर होने की घोषणा की है.

•    यह कुल संख्या का 35% है. इसमें से 26% के खिलाफ हत्या, हत्या की कोशिश, धोखाधड़ी जैसे इत्यादि गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं.

•    इसी प्रकार 25 मुख्यमंत्री अर्थात 81% करोड़पति हैं. इनमें से दो मुख्यमंत्रियों के पास 100 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति है.

•    आंध्रप्रदेश के चंद्रबाबू नायडू देश के सबसे अमीर मुख्यमंत्री हैं जिनकी घोषित संपत्ति 177 करोड़ रुपए है.

•    इस सूची में अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री प्रेमा खांडू (129 करोड़ रु) और पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह (48 करोड़ रु) भी शामिल हैं.

•    पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (30 लाख रुपये) और जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती (55 लाख रुपये) सबसे कम अमीर मुख्यमंत्रियों की सूची में हैं.

•    सबसे कम संपत्ति वाले मुख्यमंत्री त्रिपुरा के मणिक सरकार हैं, उनकी संपत्ति 27 लाख रुपये है.

•    शिक्षा के लिहाज से देखें तो 33 प्रतिशत मुख्यमंत्री ग्रेजुएट हैं, 16 प्रतिशत पोस्ट-ग्रेजुएट और 10 प्रतिशत मुख्यमंत्री हाई स्कूल पास हैं. सिक्किम के मुख्यमंत्री पीके चामलिंग के पास डॉक्टरेट की डिग्री है.

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर)

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की स्थापना वर्ष 1999 में आईआईएम अहमदाबाद के प्रोफेसरों द्वारा की गई थी. इन प्रोफेसरों ने 1999 में दिल्ली उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर के चुनाव में खड़े उम्मीदवारों की शैक्षिक, आपराधिक तथा वित्तीय पृष्ठभूमि जानने का प्रयास किया. इस आधार पर 2002 में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि चुनाव से पहले उम्मीदवारों की आपराधिक, वित्तीय एवं शैक्षिक पृष्ठभूमि सार्वजनिक की जाए.

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