स्वीडिश शोधकर्ताओं ने कैंसर के उपचार हेतु नई खोज की
स्वीडिश शोधकर्ताओं द्वारा की गई एक ताज़ा रिसर्च के अनुसार मानव शरीर में बनने वाले सूक्षम अणु जो विशेष रूप से मानव शरीर में सेलेनियम युक्त एंजाइम को रोकते हैं वह कैंसर से लड़ने के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण बन सकता है.
शोधकर्ताओं ने यह तथ्य 60 भिन्न प्रकार के कैंसर सेल्स पर वेधशाला में अणुओं के साथ किये गये प्रयोग के बाद जारी किये. यह जानकारी अमेरिकी मेडिकल जर्नल ‘साइंस ट्रांसलेशन मेडिसिन’ में 14 फरवरी 2018 को प्रकशित की गयी.
महत्व
इस शोध से यह स्पष्ट होता है कि स्वीडन के करोलिंस्का इंस्टिट्यूट में शोधकर्ताओं ने कैंसर के इलाज की इस पद्धति को चूहों पर प्रयोग किया था जिसमें ट्यूमर को तेजी से कम होते देखा गया.
शोधकर्ताओं ने आशा व्यक्त की है कि इस नये सिद्धांत से मनुष्यों में भी कैंसर के इलाज के लिए नये पैमाने स्थापित हो सकते हैं.
शोध के मुख्य तथ्य
• सेलेनियम एक रासायनिक तत्व है जो एक आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व है.
• एक सेलेनियम युक्त एंजाइम, जिसे टीआरएक्स1 कहा जाता है का इस्तेमाल विभिन्न कोशिकाओं के विकास के लिए किया जा सकता है और उन्हें ऑक्सीडेटिव तनाव से बचा सकता है.
• ऑक्सीडेटिव तनाव, मुक्त कणों के उत्पादन के बीच असंतुलन है, जो अन्य अणुओं के साथ अत्यधिक प्रतिक्रियाशील हैं, और परिणामस्वरूप क्षति को रोकने या सुधारने के लिए शरीर की क्षमता बढ़ाता है.
• कैंसर के विभिन्न प्रकारों में टीआरएक्सआर1 के बढ़े हुए स्तर को देखा जा सकता है.
• शोधकर्ताओं ने लगभग 4,00,000 कणों का अध्ययन करने के पश्चात् नये तथ्यों का पता लगाया. शोधकर्ताओं ने विशेषकर टीआरएक्सआर1 को नियंत्रित करने के लिए इस प्रयोग को सही ठहराया.
इस अवसर पर प्रमुख शोधकर्ता एलिअस अर्नर ने कहा कि कैंसर के खिलाफ यह प्रभाव कैंसर कोशिकाओं के परिणामस्वरूप सामान्य कोशिकाओं की तुलना में ऑक्सीडेटिव तनाव के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकता है, जो कि कैंसर थेरेपी में उपयोग किया जा सकता है.
उन्होंने यह भी कहा कि यह उपचार चूहों पर सही बैठा है और उम्मीद जताई जा रही है कि यह आगे चलकर कुछ वर्षों के शोध के बाद मनुष्यों के लिए भी लाभकारी सिद्ध होगा.
स्वीडिश शोधकर्ताओं द्वारा की गई एक ताज़ा रिसर्च के अनुसार मानव शरीर में बनने वाले सूक्षम अणु जो विशेष रूप से मानव शरीर में सेलेनियम युक्त एंजाइम को रोकते हैं वह कैंसर से लड़ने के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण बन सकता है.
शोधकर्ताओं ने यह तथ्य 60 भिन्न प्रकार के कैंसर सेल्स पर वेधशाला में अणुओं के साथ किये गये प्रयोग के बाद जारी किये. यह जानकारी अमेरिकी मेडिकल जर्नल ‘साइंस ट्रांसलेशन मेडिसिन’ में 14 फरवरी 2018 को प्रकशित की गयी.
महत्व
इस शोध से यह स्पष्ट होता है कि स्वीडन के करोलिंस्का इंस्टिट्यूट में शोधकर्ताओं ने कैंसर के इलाज की इस पद्धति को चूहों पर प्रयोग किया था जिसमें ट्यूमर को तेजी से कम होते देखा गया.
शोधकर्ताओं ने आशा व्यक्त की है कि इस नये सिद्धांत से मनुष्यों में भी कैंसर के इलाज के लिए नये पैमाने स्थापित हो सकते हैं.
शोध के मुख्य तथ्य
• सेलेनियम एक रासायनिक तत्व है जो एक आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व है.
• एक सेलेनियम युक्त एंजाइम, जिसे टीआरएक्स1 कहा जाता है का इस्तेमाल विभिन्न कोशिकाओं के विकास के लिए किया जा सकता है और उन्हें ऑक्सीडेटिव तनाव से बचा सकता है.
• ऑक्सीडेटिव तनाव, मुक्त कणों के उत्पादन के बीच असंतुलन है, जो अन्य अणुओं के साथ अत्यधिक प्रतिक्रियाशील हैं, और परिणामस्वरूप क्षति को रोकने या सुधारने के लिए शरीर की क्षमता बढ़ाता है.
• कैंसर के विभिन्न प्रकारों में टीआरएक्सआर1 के बढ़े हुए स्तर को देखा जा सकता है.
• शोधकर्ताओं ने लगभग 4,00,000 कणों का अध्ययन करने के पश्चात् नये तथ्यों का पता लगाया. शोधकर्ताओं ने विशेषकर टीआरएक्सआर1 को नियंत्रित करने के लिए इस प्रयोग को सही ठहराया.
इस अवसर पर प्रमुख शोधकर्ता एलिअस अर्नर ने कहा कि कैंसर के खिलाफ यह प्रभाव कैंसर कोशिकाओं के परिणामस्वरूप सामान्य कोशिकाओं की तुलना में ऑक्सीडेटिव तनाव के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकता है, जो कि कैंसर थेरेपी में उपयोग किया जा सकता है.
उन्होंने यह भी कहा कि यह उपचार चूहों पर सही बैठा है और उम्मीद जताई जा रही है कि यह आगे चलकर कुछ वर्षों के शोध के बाद मनुष्यों के लिए भी लाभकारी सिद्ध होगा.

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